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" माँ "




प्रेरणादायक कहानी
वो कहते है न माँ शब्द अपने आप में परिपूर्ण है दुनिया में हम चाहे कितने भी रिश्ते से क्यू न बधे हुए है लेकिन माँ के बिना हमारा जीवन अधुरा होता है हर रिश्ते को आप से कुछ पाने की आस रहता है लेकिन माँ का पुत्र के बीच एक ऐसा रिश्ता है जो एक माँ अपने अपने संतान को जीवनपर्यन्त सिर्फ देना जानती है माँ भूखी सो सकती है लेकिन कभी भी अपने संतान को भूखे पेट सोना सपने में भी नही देखना चाहती है माँ तो हर वक्त अपने संतान के कल्याण की बात सोचती है की किस प्रकार उसकी संतान आगे बढे और जग में नाम करे
एक व्यक्ति जो की अपने जीवन में काफी सफल हो चूका था और एक दिन अपनी माँ के पास गया और बोला “माँ आज कुछ भी मेरे पास है मै जिस सफलता के बुलंदियों को पा चूका हु वो सब आपके प्यार और ममता की ही देन है इसलिए माँ मै चाहता हु आपने जो प्यार दिया है मै उसका ऋण चुकता करना चाहता हु”
यह सुनकर माँ आश्चर्यचकित हो गयी और बोली “नही बेटा मुझे अपनी ममता और प्यार के बदले कुछ भी नही चाहिए ये तो मेरा फर्ज था जो की मै अपनी संतान के लिए किया”
लेकिन वह व्यक्ति बार बार जिद करने लगा नही माँ मै आपके प्यार और ममता के बदले कुछ देना चाहता हु माँ आप मांगों तो सही, तो बार बार जिद करने के बाद माँ बोली “ठीक है क्या तुम मेरे साथ जैसे बचपन में सोते थे वैसे सो सकते हो क्या” यह बात सुनकर वह व्यक्ति बोला बस इतनी सी बात है तो जरुर मै अपनी माँ के पास आज रात सोऊंगा
और जैसे ही रात में वह व्यक्ति अपने पास के सो गया माँ उठकर एक मग पानी ले आती है जहा अपने सोयी थी उस तरफ से पानी डाल देती है जिससे धीरे धीरे वह पानी उस व्यक्ति की तरफ भी चला गया और फिर नमी से वह व्यक्ति परेशानी महसूस करने लगा और दूसरी तरफ खिसक गया तो फिर माँ ने और पानी डाल दिया जिससे जिससे उधर भी नमी महसूस हुआ तो वह तुरंत उठ गया और अपनी माँ के हाथ में मग देखकर गुस्से से बोला “आप क्या कर रही हो माँ, मुझे सोने क्यू नही देती हो आप मुझे गीली बिस्तर पर भला कैसे सुला सकती हो”
तो वह माँ बोली “ बेटा जब तुम बचपन में मेरे साथ सोते थे तो ऐसे ही तुम भी बिस्तर गीली कर देते थे और फिर मै दूसरी तरफ तुम्हे करके खुद गीली स्थान पर सो जाती थी तुम तो मेरे प्यार और ममता का कर्ज चुकाना चाहते हो जो मैंने तुम्हारे लिए किया था क्या तुम मेरे लिए थोडा सा भी केवल एक रात के लिए गीले में सो नही सकते हो यदि तुम ऐसा कर सकते है तो मै समझ जाउंगी की तुमने मेरे ममता का कर्ज चूका दिया है”
माँ की बाते सुनकर अब उस व्यक्ति की आखे खुल गयी थी उसे अब समझ आ चूका था की जो माँ अपने न जाने कितने रातो को मेरे ख़ुशी के लिए ऐसे ही गुजार दिए है भला उस माँ का कर्ज कैसे चुकता किया जा सकता है अब वह किये पर शर्मिंदा था
इस दुनिया में चाहे कितने भी ऋण और कर्ज हो चुकाए जा सकते है लेकिन माँ के प्यार और ममता के मोल को कभी भी नही चुकाया जा सकता है यहाँ तक एक माँ अपने पुत्र को इस संसार में पाने के लिए सारे दुखो को भूल जाती है एक सन्तान जो की माँ के कलेजे का टुकड़ा ही होता है जिसे चाहकर भी माँ अपने अपने संतान को कभी भी अपने से अलग होते हुए नही देखना चाहती है माँ चाहे कितने भी दुःख में न हो लेकिन एक माँ ही अपने संतान के हित की बात हर घडी सोचती रहती है इसलिए हमे भूलकर माँ के ममता और प्यार का मोल नही लगाना चाहिए अगर कुछ देना ही है तो हमे अपनी माँ के प्रति हमेसा प्रेम बनाये रखना चाहिए क्यू की इस दुनिया में हमारी माँ जैसी कोई दूसरी चीज भी नही है...!!!

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