Skip to main content

भाई बहन का प्यार



भाई बहन का प्यार_____

          "बहन..राजू अपनी छोटी बहन देवी को लेने स्टेशन गया और उसके जाते ही निशा का बड़बड़ाना शुरू हो गया।
एक तो वैसे ही अभी पीहू और अमन के स्कूल का नया सेशन शुरू हुआ है उनकी किताबों का ,ड्रेस का,स्कूल की फीस, ऊपर से मां पिताजी की दवाइयां........ समझ नहीं आता इस समय देवी को आने की क्या जरूरत है ....... कहती है भाई, मां, पापा से मिलने का मन कर रहा है अरे आज तक कुछ किया है कभी मां पिताजी के लिए .. सारी जिम्मेदारी उठाने का क्या हमारा ही फर्ज है क्या उनके मां बाप नहीं ..ओर अब आयेगी तो उन्हें भी देने के लिए कम से कम एक सूट तो चाहिए ही मैंने कब से अपने लिए सूट नहीं खरीदा , खरीदना तो दूर सोचती भी नहीं थक गई हूं सबकी जिम्मेदारियों को निभाते निभाते .......निशा के स्वभाव को राजू अच्छी तरह वाकिफ था वह यह भी जानता है कि उसके किसी भी रिश्तेदार के आने की सुनते ही निशा के माथे में बल पड़ जाते हैं घर में कोई भी आए राजू की कोशिश रहती कि कोई ऐसी बात न हो कि जिससे आने वाले का अपमान हो बहन देवी के सामने भी निशा ने जो बनाया सबने चुपचाप खा लिया हालांकि मां का मन था कि पूरे साल बाद बेटी आई है कुछ स्पेशल बनता मगर निशा ने पहले ही इतना बखेडा कर दिया था कि वह कुछ नहीं बोली ,देवी एक रात रूकी और सुबह जाने के लिए तैयार हो गई चलते समय इतना ही कहा भैया अपना और भाभी मां पापा का भी ध्यान रखना... देवी आई और चली गई। उसके जाते ही निशा सोफे पर पसर गई और एक लंबी सी सांस ली सब अपने अपने काम में लग गए। रात में राजू ने देखा उसके कमरे के कोने में एक बैग रखा है, उसने तुरंत निशा से कहा शायद जल्दी में देवी अपना बैग भूल गई और बैग उठाने को कहा निशा ने बैग खोलकर देखा तो सन्न रह गई उसमें कुछ कपड़े , खिलौने और एक सफेद रंग का लिफाफा था जिसमें कुछ पांच सौ के तथा दो नोट दो हजार के थे एक छोटा सा कागज जिस पर लिखा था "भैया कुछ कपड़े वह खिलौने भाभी और बच्चों के लिए उपहार स्वरूप हैं रूपए आपके व मां पिताजी के लिए .......कुछ ले लेना अगर मैं कुछ लाती तो आप कभी स्वीकार नहीं करते अपने हाथ से तुम्हें देती तो लेते नहीं इसलिए रखकर जा रही हूं तुम मुझसे बड़े हो सदा तुमसे लेती रही हूं। पहली बार कुछ दिया है इंकार मत करना...तुमहारी छोटी बहन
राजू की आंखों में नमी छा गई वह मन ही मन फुसफुसाया मेरी छोटी बहन कितनी बड़ी हो गई ओर जैसे ही राजू ने निशा कीओर देखा वो चाहकर भी राजू से नजरें नहीं मिला पा रही थी....

Comments

Popular posts from this blog

इन्टरनेट की दुनिया

इन्टरनेट की दुनिया------- आज के आधुनिक समय में इंटरनेट मनुष्य के जीवन को बहुत ही सरल और ज्ञान वर्धक बना दिया है। हम इंटरनेट और टेकनटेक्नो की वजह से ही देश और दुनिया से एक दुसरे से इतना दूर होते भी जुड़ पा रहे हैं। । आज हम इसका प्रयोग शिक्षा, चिकित्सा, यातायात, हर जगह कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन, अमेरिका, ब्राजील, भारत देश में लोग ज्यादा इंटरनेट यूज करते।।    हम सभी बिना  इन्टरनेट के एक दिन-एक पल भी रहने की कल्पना भी नहीं कर सकते, हम इस पर या कहे तो ये हम पर इतना हावी हो गया है कि इसके बिना हम कुछ कर नहीं पाते, और अब इस समय पर तो सोच भी नहीं पाते,, हर छोटी-बड़ी काम पड़े तो हम इसे ही याद करते। आज के इस वक्त में हम अपना दिमाग लगाना लगभग छोर ही चुके हैं। अब तो हमें अपने आप पर भी विश्वास नहीं होता , हमे ये लगता शायद मुझसे गलती हो सकती पर इससे नहीं,  हमअपना विश्वास खो दिया है, अपना दिमाग लगाना छोड़ दिया हम बस इस पर आश्रित हो गये है. इससे हमारी सोचने समझने की शक्ति कम होती जा रही और हम एक काल्पनिक दुनिया की ओर बढ़ते चले जा रहे हैं।  हमे किसी से कोई म...

फनी

पिता_पुत्र_____ एक बार एक पिता अपने #पुत्र के कमरे के बहार से निकला तो देखा, कमरा एकदम साफ़। नयी चादर बिछी हुई और उसके उपर रखा एक पत्र। इतना साफ़ #कमरा देखकर पिता अचम्भित हो उठा। उसने वो पत्र खोला। उसमे लिखा था। #प्रिये पिता जी, मैं घर #छोड़कर जा रहा हूँ। मुझे माफ़ करना। आपको मैं बता देना चाहता हूँ मैं *दिव्या* (वर्मा अंकल की बेटी) से प्यार करता था ! लेकिन दोनों परिवार की दुश्मनी को देखते हुए मुझे लगा आप सब हमारे रिश्ते के लिए तैयार नहीं होंगे। आपको और मम्मी को..  *दिव्या* पसंद नहीं, क्यूंकि.. *वो शराब पीती है।* लेकिन आप सब नहीं जानते शराब पीने वाला कभी झुठ नहीं बोलता। मैं सुबह में जल्दी इसलिए निकला क्यूंकि मुझे उसकी *जमानत* करनी थी वो कल रात कुछ दोस्तों के साथ.. *चरस* पीती पकड़ी गयी थी और.. सबसे पहले उसने मुझे ही फ़ोन किया। क्या ये.. प्यार नहीं?  उसको *सास ससुर* पसंद नहीं ! वो आपको और मम्मी को गालियाँ देती रहती है , इसलिए हम सबके लिए ये ही अच्छा है ~ *हम अलग रहे।* रही बात मेरी नौकरी की , तो उसका भी इंतज़ाम दिव्या ने.. कर लिया है...

प्रभु की इच्छा

एक राजा ने गुलाब खरीदा । उसका नाम पुछने पर वह बोला - आप जिस नाम से पुकारेगे , वही मेरा नाम होगा । राजा ने पूछा - तू क्या खाएगा, क्या पहनेगा ? " उसने कहा_ "जो आप खिला दें और जो आप पहनने को दें ‌। "राजा ने पुछा _ "तू काम क्या करेगा ?  उसने कहा- जो आप कराएं । "  राजा ने पूछा _ तू क्या चाहता हैं ? वह बोला _ गुलाम की कोई चाहत  नहीं होती , जो आपकी चाह है वहीं में थी चाह है,  " राजा उसे हद्बय से लगा लिया और बोला मैं तुझे अपना गुरु मानता हूं , क्यों की तूने मुझे बता दिया कि परमात्मा के सेवक को कैसा होना चाहिए? उसे भी अपनी चाह मिटाकर प्रभु की इच्छानुसार कार्य करना चाहिए.....!!!!!